VIDA VX2 PLUS 3.4 kWH vs VIDA VX2 GO 3.4 kWh | WHICH IS BETTER ?

सो भाई लोगों मेरे पास Va VX2 3.4 Kz के दोनों मॉडल आ चुके हैं। ये है Va VX2 3.4 kz गो मॉडल और ये है Va VX2 3.4 kz प्लस मॉडल। सबसे पहले इनकी कीमत की बात कर लेते हैं। भाई G मॉडल का जो एक्स शोरूम प्राइस है दिल्ली का वो है ₹15,000 जबकि प्लस मॉडल का एक्स शोरूम प्राइस है ₹1,15,000। पहले इसका प्राइस कम था लेकिन अब इसका प्राइस जो है वह बढ़ चुका है। अगर हम लुक वाइज़ बात करें तो भाई दोनों गाड़ियों को फिजिकली देखने में ऐसा कोई बड़ा डिफरेंस नहीं है। इसमें आपको सात कलर ऑप्शन मिलते हैं। मतलब प्लस में गो के अंदर आपको पांच कलर ऑप्शंस मिलते हैं जो यहां पे आपको सामने दिख रहे होंगे। बाकी डिज़ाइन पॉइंट ऑफ व्यू से बताऊं तो इसका कोई डिफरेंस नहीं है। देखने में एक जो बड़ा डिफरेंस नजर आता है साफ वो ये है कि गो वेरिएंट के अंदर आपको डिस्क ब्रेक जो है वो नहीं मिलता। यहां पे सिर्फ ड्रम ब्रेक दिए हुए हैं। जबकि प्लस वेरिएंट के अंदर आपको डिस्क ब्रेक मिलता है आगे और बाकी पीछे तो दोनों गाड़ियों के अंदर ड्रम ब्रेक ही दिए हुए हैं। दूसरा अगर मैं और डिफरेंसेस की बात करूं तो भाई गो वेरिएंट के अंदर जो डिस्प्ले है वो L3 डिस्प्ले है और इसके अंदर जो है वो दो राइडिंग मोड्स हैं इको और राइड। जबकि प्लस वेरिएंट के अंदर आपको TFT डिस्प्ले मिलता है और इसके अंदर आपको तीन राइडिंग मोड्स मिल जाते हैं। इको राइड और स्पोर्ट्स मोटर पावर दोनों की सेम है टॉप स्पीड में लेकिन अंतर है। प्लस के अंदर जो आपको टॉप स्पीड मिलती है वो 80 कि.मी. पर आर की मिलती है और इसका एक्सलरेशन भी है वो भी थोड़ा तेज है। जबकि गो वेरिएंट के अंदर जो इसकी टॉप स्पीड है वो 70 कि.मी. पर आर है और इसका एक्सलरेशन भी थोड़ा स्लो है। अब मोटर पावर तो सेम है लेकिन ग्रेडेबिलिटी के अंदर भी अंतर है। मतलब अगर किसी चढ़ाई पे आप चढ़ाओगे तो इसकी जो ग्रेबिलिटी है प्लस की वो 18° की है। जबकि गो की जो ग्रेडेबिलिटी है वो 15° की है। लेकिन ये गाड़ी भी आसानी से चढ़ जाएगी। अब सबसे जरूरी चीज के बारे में बात कर लेते हैं जिसकी वजह से लोग इलेक्ट्रिक व्हीकल्स लेते हैं। रेंज देखो भाई क्योंकि दोनों ही व्हीकल्स के अंदर आपको दो रिमूवल बैटरी बैग्स मिलते हैं। जिनकी टोटल कैपेसिटी 3.4 k की है। हां, बैटरी कैपेसिटी में कोई भी डिफरेंस नहीं है। इसकी बैटरी यहां पे लगती है। आपको दिखा देता हूं। यह देखो यहां पे चाबी आप थोड़ा सा घुमाओगे। यह ओपन हो जाएगा। उसके बाद यह मैंने चाबी निकाल ली। यहां पे आपको इसको लगा के इसको लॉक खोलना होगा। इसको ऊपर करोगे आप, तो यह इसकी बैटरी है। इसके अंदर दो रिमूवल बैटरीज है ये। एक जो बैटरी है वो 1.7 किलो की है। तो दोनों का टोटल बनता है वो 3.4 k बनता है। ठीक है? अब इसमें जो रेंज का डिफरेंस आएगा ना वो कोई भी नहीं है। लेकिन क्योंकि इसकी टॉप स्पीड कम है। इसका एक्सेलरेशन थोड़ा स्लो है। तो मेरे हिसाब से ये वाला व्हीकल जो है ना वो प्लस वेरिएंट के मुकाबले थोड़ी सी ज्यादा रेंज तो दे देगा। लेकिन अगर आप धीरे चलाओगे तो क्योंकि देखो ज्यादा भागेगा भी नहीं वाला वेरिएंट। और अगर मैं प्लस वेरिएंट की बात करूं तो यह वेरिएंट की जो एक्चुअल रेंज निकल के आती है क्योंकि हमने इसका कस्टमर फीडबैक भी बना लिया है। हमने इसको थोड़े दिन चला के भी देखा है। तो और मेरे कुछ बहुत सारे दोस्तों के पास भी ये वाली गाड़ी है। ये गाड़ी जो है वो आपको लगभग 100 कि.मी. की एक्चुअल रेंज तो दे ही देती है। और मेरे हिसाब से ये जो गो वेरिएंट है ये आपको थोड़ी सी ज्यादा रेंज भी दे सकता है। अगर आप धीरे गाड़ी चलाओगे तो। अब चार्जिंग के बारे में बात कर लेते हैं। तो भाई चार्जिंग के मामले में भी कोई डिफरेंस नहीं है। यहां पे जो इसका चार्जर लगा हुआ है। यह देखो आपको चार्जर दिया हुआ है। इस व्हीकल को ज़ीरो से 80% चार्ज करने में सवा घंटे का टाइम लगता है। और पूरा चार्ज करने में तकरीबन 6 घंटे का टाइम लगता है। बाकी जो एक्चुअल में यूजर फीडबैक है वो बताते हैं कि भाई इस व्हीकल को पूरा चार्ज करने के लिए प्लस वेरिएंट को थोड़ा ज्यादा टाइम लगता है। बाकी कंपनी क्लेम क्लेम करती है कि ये 6 घंटे के अंदर पूरी चार्ज हो जाएगी। बाकी तो इसके प्लस वेरिएंट में और गो वेरिएंट में चार्जिंग में कोई भी डिफरेंस नहीं है। दोनों व्हीकल जो है वोस्ट चार्जिंग को सपोर्ट करते हैं। आप इन्हें एथर और Vida केस्ट चार्जिंग नेटवर्क सेस्ट चार्ज कर सकते हो। यहां पे इसमें यहां स्लॉट दिया होता है। इसका चार्जिंग पोर्ट जो है प्लस वेरिएंट के अंदर भी दिया हुआ है। यहां पे गो के अंदर भी दिया हुआ है। इलेक्ट्रिक स्कूटर लेते टाइम लोगों के माइंड में बैटरी को लेके बहुत ज्यादा मिथ और मिसकंसेप्शन रहता है। जो बैटरी वारंटी से सॉल्व होता है क्योंकि उनको एक सेटिस्फेक्शन देता है मेंटली। तो भाई दोनों ही व्हीकल्स के अंदर मतलब Hero Vida की पूरी लाइन अप के अंदर बल्कि आपको जो बैटरी के ऊपर वारंटी मिलती है स्टैंडर्ड वारंटी वो 3 साल या 300 कि.मी. की मिलती है। और अगर आप 6 या ₹6500 एक्स्ट्रा पे करते हो तो बैटरी के ऊपर आपको 5 साल या 60 कि.मी. की एक्सटेंडेड वारंटी मिल जाती है। और अगर मैं व्हीकल वारंटी की बात करूं तो भाई VA एकमात्र ऐसा ब्रांड है अभी जो जो व्हीकल के ऊपर स्टैंडर्ड वारंटी ही 5 साल या 50000 कि.मी. की दे रहा है। और बैटरी के ऊपर एक्सटेंडेड वारंटी। यह जरूरी नहीं है कि जब आप व्हीकल खरीद रहे हैं तभी लें। आप 180 दिन के अंदर कभी भी ले सकते हैं जब आपने व्हीकल परचेस करा है। अब प्लस का डिस्प्ले तो हमने बहुत सारी वीडियो के अंदर दिखा दिया है। लोगों ने देख भी रखा है। अब मैं आपको यहां पे गो का डिस्प्ले कैसा है वो आपको बता देता हूं। आप बताइए पास में। देखो भाई, यह जो है ना गो वेरिएंट का डिस्प्ले है। यह इसके अंदर एलसीडी डिस्प्ले दिया हुआ है। यहां पे मोटर ऑफ लिखा है। अब जैसे मैं ब्रेक दबा के इसको यहां पे प्रेस करता हूं। स्टार्ट बटन, तो यह मोटर ऑन हो जाएगी। यहां पे रेंज शो कर रहा है मुझे क्योंकि 75% बैटरी चार्ज है। देखो दोनों यहां पे शो कर रहा है। यहां पे बार्स दिखा रहा है और यह परसेंटेज है। और यहां पे 75 कि.मी. की रेंज शो कर रहा है। यहां पे ये इको मोड लिखा हुआ है। अभी दो मोड्स हैं इसके अंदर इको मोड और ये राइड मोड। यहां पे बूस्ट मोड का साइन बना हुआ है। ये ऑन है। अब बूस्ट मोड की वर्किंग कैसी है? आप इस वीडियो से देख लीजिए। मान लीजिए मैं इको मोड पे गाड़ी चला रहा हूं। तो इको मोड पे उतना अच्छा एक्सलरेशन होता नहीं है। तो अगर मुझे कहीं ओवरटेक करना है या फिर कोई ऐसी जगह है जहां पे मुझे एकदम से पावर आउटपुट ज्यादा चाहिए तो मुझे मोड चेंज करना होता है। पर इसमें ऐसी कोई दिक्कत नहीं है। जैसे मान लीजिए मुझे इस ट्रक को ओवरटेक करना है। इको मोड पे स्पीड धीर रहेगी तो मैं नहीं कर पाऊंगा। यहीं पे अगर मैं इसको थ्रोटल को और ज्यादा देता हूं तो मेरी स्पीड जो है वो तेज़ हो जाएगी और मैं फिर व्हीकल को ओवरटेक आसानी से कर सकता हूं। अब हम वापिस अपने डिस्प्ले के ऊपर आ जाते हैं। जो इसका डिस्प्ले है वो ये वाले जॉयस्टिक से कंट्रोल होता है। अब मैं इसको देख लेता हूं उसमें क्या-क्या फीचर्स हैं। जैसे बूस्ट मोड तो मैंने आपको दिखा ही दिया। यहां पर आपको ट्रिप दिख रहा है। ट्रिप ए की डिस्टेंस दिख रही है। यहां पे आप ट्रिप भी देख सकते हैं। ये फिर सेटिंग्स है। सेटिंग्स में देख लेते हैं क्या-क्या है इसके अंदर। मैंने इसको लॉन्ग प्रेस करा तो मैं सेटिंग्स के अंदर चला गया। ठीक है? यहां ये बूस्ट आ गया सेटिंग्स के अंदर। ब्राइट ऑटो मतलब जो डिस्प्ले की ब्राइटनेस है वो ऑटो पे है। अभी ये यहां से मैं इसको बड़ा और घटा सकता हूं। जैसे कि 100 आ गई है। इसके मैं घटाऊंगा इसको अभी। यह तो यहां मैं इसको ऑटो पे कर देता हूं। उसके बाद यहां पे डेट शो कर रहा है। क्लॉक बैटरी का वोल्टेज ये आपको सॉफ्टवेयर वर्जन शो कर रहा है। और ये वापिस बूस्ट आ गया है। तो सेटिंग्स के अंदर इसमें इतनी चीजें हैं। तो बेसिकली क्योंकि कम बजट वाला इलेक्ट्रिक स्कूटर है इसलिए इसके डिस्प्ले में और फीचर्स में बहुत ज्यादा चीजें नहीं है। आपके आईडिया के लिए मैं इसके बाद आपको प्लस वेरिएंट का डिस्प्ले दिखा देता हूं ताकि आपको एक्चुअल में डिफरेंस समझ में आ जाएगा। अब हम डिस्प्ले देख लेते हैं प्लस वेरिएंट का। यह टीएफटी डिस्प्ले है और इसके अंदर तो बहुत सारे फीचर्स दिए हुए हैं। यह जो है यह डिजिटल डिस्प्ले है जबकि गो वेरिएंट के अंदर एनालॉग डिस्प्ले दिया हुआ है। एक और डिफरेंस जो गो और प्लस मॉडल के अंदर है वो यह कि गो मॉडल के अंदर आपको ब्रेक लॉक दिया हुआ है जो कि प्लस मॉडल में नहीं दिया हुआ। यह मेरे हिसाब से प्लस मॉडल में इसलिए नहीं दिया क्योंकि अब सारे व्हीकल्स के अंदर कंबाइंड ब्रेकिंग सिस्टम आता है। मतलब आप पीछे का ब्रेक लगाते हो तो आगे का ब्रेक साथ में भी लगता है और प्लस मॉडल के अंदर क्योंकि आगे डिस्क ब्रेक दिया हुआ है तो अगर वो लंबे टाइम तक लॉक रहेगा तो उसमें ऑयल लीकेज के चांसेस होंगे। तो इसी वजह से मेरे हिसाब से प्लस मॉडल के अंदर यह ब्रेक लॉक नहीं दिया हुआ। यह सिर्फ गो मॉडल के अंदर अवेलेबल है। अगर मैं बूट स्पेस की बात करूं तो क्योंकि इस व्हीकल के अंदर बैटरी जो है बूट स्पेस के अंदर लगी हुई है। इसलिए इसमें आपको कम बूट स्पेस मिलता है। लेकिन गो वेरिएंट के अंदर भी आपको 27.2 L का बूट स्पेस मिल रहा है। जिसमें एक हाफ साइज हेलमेट जो है आपका वो आ जाएगा। तो अगर आपको देख के पता लगाना है कि कौन सी गाड़ी गो वेरिएंट है और कौन सी गाड़ी प्लस वेरिएंट है तो आप कुछ चीजें देख के बता सकते हो। जैसे प्लस के अंदर आपको डिस्क ब्रेक दिया हुआ है। जबकि गो के अंदर आपको ड्रम ब्रेक मिलता है। गो के अंदर यहां इसके नाम के नीचे यहां पे आपको VX2 गो लिखा हुआ है। जबकि प्लस के अंदर वहां नाम के नीचे आपको यहां पे लिखा रहता है VX2 प्लस। और तीसरा डिफरेंस है कलर का गो वेरिएंट के अंदर आपको यह दोनों कलर नहीं मिलेंगे जो प्लस वेरिएंट में होंगे। लोग सर्विस के बारे में भी जानना चाहते हैं तो Hero Vida की पूरी लाइनअप के अंदर सर्विस शेड्यूल जो है वो ये है कि पहली सर्विस आपकी पहले मंथ या फिर 1000 कि.मी. पे होती है। दूसरी सर्विस 6 मंथ या फिर 7500 कि.मी. पे और तीसरी सर्विस 12 महीने या फिर 15,000 कि.मी. पे। यह सारी फ्री सर्विस हैं। अब इस वीडियो की सबसे जरूरी चीज़ के बारे में बात कर लेते हैं कि कौन से लोगों को गो वेरिएंट लेना चाहिए और कौन से लोगों को प्लस वेरिएंट लेना चाहिए। देखो सिंपल सी चीज है। अगर आपका बजट थोड़ा ज्यादा है, आप थोड़े ज्यादा पैसे खर्च कर सकते हो। आपको रेंज तो चाहिए ही चाहिए। साथ में आपको फीचर्स भी चाहिए, थोड़ी अच्छी परफॉर्मेंस भी चाहिए। आपको डिस्क ब्रेक भी चाहिए। क्योंकि जो सबसे बड़ा डिफरेंस मुझे लग रहा है ना यहां पे वो डिस्क ब्रेक का ही है। तो आप प्लस वेरिएंट ले सकते हो। बाकी अगर आपका बजट बहुत ज्यादा टाइट है। आपको रेंज उतनी चाहिए 100 110 कि.मी. की। आपको फीचर से उतना ज्यादा लेना देना नहीं है। आपको थोड़ी कम परफॉर्मेंस भी चलेगी। और मेन बात आपको गाड़ी धीरे चलानी है तो आप यह वाला वेरिएंट ले सकते हो क्योंकि ड्रम ब्रेक में भी आपका काम हो जाएगा। लेकिन सबसे बड़ा डिफरेंस आएगा कि अगर आपको गाड़ी सिटी के अंदर ज्यादा चलानी है तो फिर आप ये वाली गाड़ी ले सकते हो। लेकिन अगर आपका थोड़ा भी ट्रैवल हाईवे के ऊपर होने वाला है तो फिर मेरे हिसाब से आपको प्लस वेरिएंट लेना चाहिए क्योंकि वहां पे थोड़ी परफॉर्मेंस आपके काम आ जाएगी। मैंने दोनों मॉडल की सारी जरूरी चीजें आपको वीडियो में बता दी हैं। अगर आपको फिर भी कोई डाउट है तो कमेंट करके पूछ सकते हैं और इलेक्ट्रिक गाड़ी के ऐसे ही डिटेल वीडियोस के लिए दिल टूटा पकर को सब्सक्राइब कर लीजिए।

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