Fast EVs Are Killing Petrol Sedans! Can Octavia vRS Fight Back? | Review

भारत की कार मार्केट मेजरली दो प्राइस ब्रैकेट्स में डिवाइडेड है। पहला है 35 लाख के अंदर जहां पर मास मार्केट कार्स बिकती हैं और यहां पर सेल सबसे ज्यादा होती हैं और दूसरा है 70 लाख से ऊपर का पैकेट जहां पर सेल्स तो उतनी ज्यादा नहीं होती है लेकिन गाड़ियों के ऑप्शंस बहुत ज्यादा है और फिर आता है ₹30 लाख से लेकर ₹70 लाख के बीच का ब्रैकेट जहां पर पड़ा है सन्नाटा ना तो यहां पर ज्यादा गाड़ियां बिक रही हैं और ना ही यहां पर बहुत ज्यादा ऑप्शंस अवेलेबल है बायरर्स के लिए ₹60 लाख में कुछ लेने जाओगे तो वही आपको Fortuner कैमरी या फिर एकद एंट्री लेवल लग्जरी कार्स ही देखने को मिलेंगी लेकिन अब बात बदल चुकी है क्योंकि Skoda अपनी ऑक्टा BRS को इंडिया में लेकर आ चुकी है और यह कोई आर्म डी सेगमेंट सेडान नहीं है। यह कार 261 बीएp की पावर बनाती है और इसीलिए Skoda ने इसकी ड्राइव बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर रखी थी यानी कि रेस ट्रैक पर। इस वीडियो में मैं आपको इस गाड़ी की परफॉर्मेंस, हैंडलिंग गाड़ी के ओवरऑल इंटीरियर्स और एक्सटरियर्स के बारे में तो बताऊंगा ही। लेकिन साथ ही साथ कुछ सवालों के जवाब भी दूंगा। जैसे कि क्या यह VRS जैसी ₹60 लाख से भी ज्यादा ऑन रोड प्राइस पर आने वाली परफॉर्मेंसान आज की डेट में सेंस बनाती है? जब आज की डेट में कई इलेक्ट्रिक कार्स इससे भी ज्यादा पावर बना रही हैं ऑलमोस्ट इससे आधे प्राइस पर। आल्सो क्या ₹20 लाख और डालकर M340i या फिर Audi S5 जैसी गाड़ियों की तरफ नहीं जाना चाहिए जो कि जर्मन लग्जरी ब्रांड्स बना रहे हैं। वैसे उनकी तरफ जाओ या मत जाओ इसकी तरफ तो अब आप नहीं जा पाओगे क्योंकि सिर्फ 100 यूनिट्स ही इंपोर्ट करी गई थी इंडिया के अंदर और सारी की सारी 100 यूनिट्स ऑलरेडी बुक्ड हो चुकी हैं। तो इसीलिए इस वीडियो के अंदर हम इस गाड़ी की क्रेजी फैन फॉलोइंग को भी समझेंगे कि भैया इतनी ज्यादा पॉपुलर क्यों है यह गाड़ी। एंड एक्चुअली पहले इसी को समझते हैं कि क्यों यह कार भारत के अंदर इतनी ज्यादा खास है। ऑक्टाविया की एंट्री इंडिया के अंदर 200 में हुई थी और यह गाड़ी यानी कि ऑक्टा RS मिड 200 के अंदर इंडिया में आ गई थी और यह गाड़ी तब 150 बीएp की पावर बनाती थी जो कि उस टाइम के हिसाब से काफी ज्यादा थी। फिर आई lरा RS जो कि फॉरेन मार्केट के अंदर ऑक्टाविया की ही सेकंड जनरेशन थी और इस गाड़ी को इंडिया के अंदर 2011 में लाया गया और यह गाड़ी 160 बीएp की पावर बनाती थी अपने 1.8 L के TSI इंजन के साथ। फिर 2017 में आई ऑक्टा RS 230 एंड एज नेम सजेस्ट यह गाड़ी 230 बीएp की पावर बनाती थी और फिर 2020 में आई RS 245 यानी कि यह गाड़ी 245 बीएp की पावर बनाती थी और अब जो ऑक्टा RS आई है यह बनाती है 261 बीएp की पावर। अभी तक जो ऑक्टा है मुझे सबसे ज्यादा अच्छी लगती थी वो थी Mark 3 फेसलिफ्ट यानी कि यह वाली गाड़ी। लेकिन न्यू RS को इन पर्सन देखकर आई कैन से दिस इज द बेस्ट लुकिंग एंड मोस्ट स्ट्राइकिंग Skoda यू कैन गेट इन इंडिया राइट नाउ। गाड़ी का जो फ्रंट साइड डिजाइन है वो बहुत ही ज्यादा अग्रेसिव दिखाई देता है। जो इस गाड़ी की हेडलाइट्स हैं वो कुछ-कुछ लार्ज जनरेशन वाली जो वीआरs है उसकी बग आई डिजाइन की थोड़ी-थोड़ी सी झलक देती है। उसका थोड़ा सा इवॉल्व वर्जन दिखाई देती है। गाड़ी में जो Skoda की ग्रिल है वैसे तो वो टिपिकल ग्रिल ही है लेकिन वो काफी ज्यादा वाइड है जिसकी वजह से गाड़ी बहुत ज्यादा अग्रेसिव देती है। मतलब गाड़ी की जो नोज है वो बहुत ज्यादा अग्रेसिव है और लगती है कि यार गाड़ी हां परफॉर्मेंस सेडान ही है एक। कार को साइड से देखें तो बॉडी लाइंस बहुत ज्यादा प्रॉमिनेंट है और शार्प बॉडी लाइंस की वजह से गाड़ी बहुत ज्यादा स्पोर्टी लगती है। लेकिन इस आइस कार में जो व्हील्स दिए गए हैं यह आपको थोड़े से ईवी वाली वाइब देंगे और यह इस गाड़ी के अंदर काम भी वही वाला करते हैं जो कि ईवीस के अंदर करते हैं यानी कि ड्रैग को कम करना। पर्सनली आई फील यह गाड़ी इन व्हील्स के साथ भी बहुत ज्यादा अच्छी लग रही है और इसका एक बड़ा रीजन इनका साइज हो सकता है। यह व्हील्स 19 इंच के मैसिव व्हील्स हैं और जो इस तरीके की लो प्रोफाइल वाले बड़े व्हील्स होते हैं ना वो सेडान्स पे ज्यादा अच्छे लगते हैं। गाड़ी पीछे से भी बहुत ज्यादा स्पोर्टी लगती है। एक टिपिकल और अच्छी दिखने वाली सेडान जैसी ही लगती है। लेकिन शायद से इसको एक सेडान कहना पूरी तरीके से ठीक नहीं होगा। इवन दो यह दिखती है एक सेडान जैसी ही है। क्योंकि जब आप इसका बूट ओपन करते हो ना तो सिर्फ बूट ही ओपन नहीं होता है। बल्कि यह रेयर ग्लास एरिया भी पूरा का पूरा ओपन हो जाता है। जिस चलते आप भारी सामान और बड़ा सामान बहुत ही प्रैक्टिकली इसके अंदर रख सकते हो बड़ी आसानी से। और क्योंकि यह इस तरीके से ओपन होता है। इसीलिए इसे लिफ्ट बैग बोला जाता है। और यह जो बूट है ना यह साइज में भी बहुत ज्यादा बड़ा है। इसका जो साइज है वह 600 लीटर का है। लेकिन यह बूट यहीं पर खत्म नहीं होता है। अगर आप इस गाड़ी की पीछे वाली सीट्स को टॉपल कर देते हो तो यह बूट बढ़कर 1500 लीटर का हो जाता है। यानी यह गाड़ी तेज होने के साथ-साथ बहुत ज्यादा प्रैक्टिकल भी है। लेकिन मुझे थोड़ा सा शक है कि क्या इंडिया के अंदर लोग इस प्रैक्टिकिटी का फायदा उठाएंगे इस प्राइस पॉइंट पर आने वाली गाड़ी के अंदर। क्योंकि क्या है देखो यह यूरोप के अंदर तो सेंस बनाता है। वहां से इंपोर्ट करी गई है यह गाड़ी और वहां पर सेंस इसलिए बनाता है क्योंकि वहां पर सामान को ट्रांसपोर्ट करना बहुत ज्यादा महंगा साबित होता है। बहुत ज्यादा पैसा देना पड़ता है। इसीलिए लोग अपनी गाड़ियों के अंदर ही बड़ा-बड़ा सामान भी ले जाते हैं। लेकिन इंडिया के अंदर सामान शिफ्ट कराना बहुत ही ज्यादा सस्ता है। अगर स्पेशली हम कंपेयर करें यूरोप से तो वहां के मुकाबले काफी ज्यादा सस्ता है। और इंडिया के अंदर आसान भी है। आपको बस एक फोन में ऐप चलानी है। उसके थ्रू आप अपने सामान को शिफ्ट कर सकते हो बहुत कम प्राइसेस में। तो आई डोंट थिंक इस प्रैक्टिकिटी का भी बहुत ज्यादा इस्तेमाल करने वाले हैं इंडिया के अंदर लोग। खैर, वैसे जितना इसका मुझे बूट प्रैक्टिकल लगा उतना रेयर सीटिंग स्पेस प्रैक्टिकल नहीं लगा। मैं इसकी सीट्स की बात नहीं कर रहा हूं। वह काफी ज्यादा प्रैक्टिकल है। काफी ज्यादा कंफर्टेबल है। अब तक मैंने कई तरीके की 1 करोड़ से नीचे आने वाली परफॉर्मेंस कार्स को रिव्यू करा है। उनको समझा है। और अगर मैं बात करूं M34i या फिर A35 AMG जैसी गाड़ियों की तो मुझे इनका रियर सीटिंग स्पेस कंफर्टेबल तो लगा। लेकिन मुझे ऐसा लगा कि इनका जो रेयर सीटिंग स्पेस है वो थोड़ा सा क्रम्ड है। स्पेशली अगर सीएलए 45 की बात करूं तो उसमें अगर आप बैठते हो तो आपके जो घुटने हैं वो ऊपर हो जाते हैं और आपको अंडर थाइस सपोर्ट मिलता ही नहीं है। लेकिन आरएस की जो सीट्स हैं वो एक्सटेंडेड है जिसकी वजह से आपको अंडर थाई सपोर्ट भी अच्छा खासा मिलता है। लेकिन जहां मुझे प्रैक्टिकिटी की थोड़ी सी कमी लगी वो है सेंटर टनल। यहां पर आपको सेंटर टनल तो थोड़ी सी ऊंची मिलती ही है। उसके साथ ही साथ उसके ऊपर लगभग 6 इंच ऊंचा और स्टोरेज एरिया बना रखा है। जहां पर आप कप वगैरह भी रख सकते हो अपने। अब यह एरिया प्रैक्टिकली तो यूटिलाइज किया जा सकता है, लेकिन इसकी वजह से पीछे वाली सीट्स पे सिर्फ दो ही लोग बैठ सकते हैं। तीसरा बंदा बैठ ही नहीं सकता। इवन दो पीछे की सीट्स पे तीनों हेडर्स दिए गए हैं। लेकिन तीसरा बंदा नहीं बैठ सकता क्योंकि उसके पैर दोनों तरफ जाएंगे फिर। तो इसी वजह से इस गाड़ी के अंदर पांच लोग नहीं बैठ सकते और यह सिर्फ एक चार लोगों वाली गाड़ी बनके रह जाती है। वहीं पर अगर हम इसे कंपेयर करें BMW से यानी कि M340i से या फिर C35 AMG से तो वहां पर हमें ऐसा कुछ देखने को नहीं मिलता है। बाकी अगर मैं फिर से सीट पर आऊं तो कंफर्ट बहुत ज्यादा अच्छा है सीट्स का। मटेरियल बहुत ज्यादा प्रीमियम यूज़ किए गए हैं। सीट्स पर परफ्यूरेशन भी देखने को मिलता है आपको और यह सीट बहुत ज्यादा स्पोर्टी भी फील होती हैं। मतलब दिखने के मामले में और होल्ड भी अच्छे से करके रखती है। आपको जब आपकी गाड़ी तेज चल रही होती है तो आपको अच्छा होल्ड मिलता है इन पर। और हां, आप पीछे की सीट पर बैठे-बैठे ही बूट को भी एक्सेस कर सकते हो जो कि बहुत ही रेयर होता है। कई गाड़ियों में नहीं मिलता है यह। रियर के बाद अगर हम फ्रंट सीट्स की बात करें तो यह फुल्ली इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल है। इसमें आपको एक्सटेंडेबल थाई सपोर्ट भी मिलता है। जिसकी वजह से यह सीट बहुत ही ज्यादा कंफर्टेबल हो जाती है। और इन सीट्स पर बैठते ही समझ में आ जाता है कि यह कितनी ज्यादा कंफर्टेबल और सपोर्टिंग है। एंड कार की सीट्स पे बैठ के जो कॉकपिट का व्यू मिलता है ना उसे देखकर भी इंस्टेंटली यही समझ में आता है कि यह एक परफॉर्मेंस कार ही है। स्टीयरिंग आपको वही मिलता है जो कि Skoda की इंडिया वाली गाड़ियों में मिलता है। लेकिन जो मटेरियल्स हैं वो इसमें ज्यादा बेटर यूज़ करे गए हैं। स्पेशली अगर स्टीयरिंग की बात करूं तो डैशबोर्ड में भी काफी ज्यादा प्रीमियम मटेरियल्स का इस्तेमाल किया गया है। मैं यह नहीं कह रहा कि यह BMW या फिर Mercedes लेवल के मटेरियल्स हैं। यहां पर आपको थोड़ी बहुत हार्ड प्लास्टिक्स भी देखने को मिलती है। लेकिन यह जो इन्होंने अल्कनारा लेदर टाइप का मटेरियल यूज़ किया है या फिर जो ऊपर की तरफ सॉफ्ट प्लास्टिक दी गई है और यह जो कार्बन फाइबर जैसा पैटर्न दिया गया है, यह इसको प्रीमियम फिनिश देते हैं। और यह जो पूरा का पूरा ब्लैक इंटीरियर है ना, यह बहुत ज्यादा स्पोर्टी और प्रीमियम फील देता है गाड़ी को अंदर से। लेकिन जो लोग प्रीमियमनेस को सनरूफ से जोड़कर देखते हैं, वह जरूर दुखी होंगे क्योंकि इस गाड़ी के अंदर सनरूफ नहीं मिलती है। जो इस गाड़ी का इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर है, वह इंडिया में आने वाली गाड़ियों से अलग है, बड़ा है और इसकी क्वालिटी काफी ज्यादा अच्छी है। मतलब रेजोल्यूशन की बात कर रहा हूं। काफी हाई रेजोल्यूशन वाला इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर है यह। इसमें जो इंफोटेनमेंट स्क्रीन मिलती है, वो भी बहुत ज्यादा बड़ी है। 13 इंच की स्क्रीन लगा रखी है इसके अंदर। इसका रेजोल्यूशन अच्छा है, टच क्वालिटी अच्छी है और जो इसका UI है वह बहुत ही ज्यादा मॉडर्न फील देता है। स्क्रीन के नीचे आपको सात आठ बटंस देखने को मिलते हैं जो कि अलग-अलग चीजों को कंट्रोल करते हैं। लेकिन मुझे इसके अंदर एक कमी यह लगी कि जो एसीए कंट्रोल्स हैं कुछ स्क्रीन के अंदर ही दे रखे हैं और कुछ ही जो हैं वो बटंस के ऊपर दिए हैं और पर्सनली मुझे यह बात पसंद नहीं आती है। साथ ही साथ इसके अंदर एक प्रॉपर गियर नब देने की जगह एक छोटा सा स्लाइडिंग वाला बटन दे रखा है जो कि अगेन मुझे पर्सनली पसंद नहीं है। स्पेशली स्पोर्ट्स कार के अंदर तो हमें देना ही चाहिए ऐसा। कार में डिफरेंट ड्राइविंग मोड्स आते हैं जो कि आप स्क्रीन से भी चेंज कर सकते हो। लेकिन मैंने यह कार चलाई है स्पोर्ट मोड पे क्योंकि हम थे BIC पे यानी कि रेस ट्रैक पे और इवन दो यह BIआई पर मेरा पहला एक्सपीरियंस था और इस गाड़ी के साथ भी पहला एक्सपीरियंस था। लेकिन इस बात के बावजूद भी मैं इस गाड़ी को रेस ट्रैक पर काफी ज्यादा तेज चला पाया। मुझे बहुत ज्यादा स्टेबल फील हुई है बहुत ज्यादा हाई स्पीड्स पर भी। इस गाड़ी के अंदर 2 L का फोर सिलेंडर इंजन आता है जो कि 261 बीएp की पावर और 370 एनm का टॉर्क निकालता है। और यह जो टॉर्क है ना आपको 1600 आरपीएम से ही मिलने लग जाता है। 1600 आरपीएम से लेकर लगभग 4100 आरपीएम के बीच में यह बैंड में रहता है यह टॉर्क। और इतने अच्छे लो एंड टॉर्क की वजह से ना आपको इसका जो फायदा है रेस ट्रैक के ऊपर भी देखने को मिलता है। ट्रैक के मोडों पर स्पीड कम करके फिर से एक्सलरेट करना पड़ता है। और उस सिचुएशन में गाड़ी कई बार बिना गियर डाउन करे ही स्पीड पकड़ लेती है। थैंक्स टू इट्स लो स्लो एंड टॉप। और अगर स्पीड की बात हो ही रही है तो मैं बता दूं कि इस गाड़ी की जो टॉप स्पीड है वो है 250 km/h की और यह कार 0 टू 100 सिर्फ 6.1 सेकंड्स में कर सकती है। यह गाड़ी इतनी ज्यादा फास्ट है कि बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट के लॉन्गेस्ट पार्ट में यह कार आराम से 200 के पार चली गई थी और यह जो इस ट्रैक का लॉन्गेस्ट स्ट्रेच है ना यह सिर्फ 1.2 कि.मी. का ही है। बहुत फास्ट कार है। पर क्या यह इतनी फास्ट है कि आप ₹60 लाख से भी ज्यादा दो इस गाड़ी के लिए। आज से 3 साल पहले पूछते तो मैं यही बोलता कि यस दिस इज फास्ट इनफ। लेकिन अब जब ऑलरेडी बहुत ज्यादा पावरफुल EVs आ चुकी है मार्केट में तो लोगों को यह गाड़ी उतनी ज्यादा क्विक फील नहीं होगी जो ऑलरेडी Harry EV या फिर XUV 9 जैसी गाड़ियां चला चुके हैं जो कि इससे लगभग आधे प्राइस पर आ जाती हैं ऑलमोस्ट आधे प्राइस पे। VID की जो सील है वो ऑलमोस्ट सिमिलर प्राइस पर आती है और वो 523 बीएपी की पावर बनाती है। तो सिर्फ पावर के हिसाब से देखें या फिर एक्सीलरेशन के हिसाब से देखें तो हो सकता है वहां पर आप इसके प्राइस को जस्टिफाई ना कर पाओ। लेकिन बॉस यहां पर हमें यह समझने की जरूरत है कि यह जो परफॉर्मेंस आइस कार्स होती है ना यह सिर्फ तेज नहीं होती हैं बल्कि ये इमोशंस कैरी करती हैं। इन गाड़ियों के जब आप गियर चेंज करते हो इनकी जो आवाज होती है और जो इनकी वाइबेशंस होती है ना उनसे आपको एडerनलिन रश मिलता है। जैसे-जैसे एक आइस कार की स्पीड बढ़ती है वैसे-वैसे उसकी आरपीएम भी बढ़ती है और वैसे-वैसे आपका एडर्नलिन भी बढ़ता है और फिर जब आप ऑक्टाविया के सेवन स्पीड डीसीडी ट्रांसमिशन को शिफ्ट करते हो, उसकी आवाज सुनते हो, शिफ्ट्स को फील करते हो, तो यह गाड़ी आपको और भी ज्यादा ह्यूमन लाइक फील करवाती है। और यहां पर अगेन मैं यह भी बोलूंगा कि पैसे आप सिर्फ फील के नहीं दे रहे हो बल्कि इस गाड़ी की जो हैंडलिंग है ना उसके लिए भी दे रहे हो। अदर दैन मे बी Audi S5 एंड M34i मुझे नहीं लगता कि 1 करोड़ के अंदर कोई भी ऐसी गाड़ी है जो इस जैसी हैंडलिंग आपको दे सकती है। इस कार के साथ हमने मूस टेस्ट करा, स्ल आलम करा और स्माल सर्किट पर भी इसकी हैंडलिंग को टेस्ट करा। मैंने मूस टेस्ट पर पहली बार थोड़ा आराम से भगाया लेकिन जो इंस्ट्रक्टर थे उन्होंने 60 किलोमीटर पर आर की स्पीड पर इसको भगाया था मूस टेस्ट के अंदर और यह काफी ज्यादा स्पीड होती है अगर आप किलोमीटर 77 की वीडियोस देखोगे तो आपको समझ में आएगा कि ये ऑलमोस्ट वही वाली स्पीड्स है जो वहां पर वो लोग करते हैं और यहां पर सबसे अच्छी बात यह रही कि गाड़ी ने बिल्कुल भी अंडरस्टेयर नहीं करा। हल्की सी टायर की स्पीकिंग साउंड जरूर आ रही है लेकिन अंडरस्टेयर बिल्कुल भी नहीं था। और जब मैं स्लालम परफॉर्म कर रहा हूं तब भी गाड़ी बिल्कुल भी अंडरस्टेयर नहीं हो रही है और बिल्कुल भी जो टायर्स हैं इसके वो रोड की ग्रिप को नहीं छोड़ रहे हैं। अच्छा यहां पर कई सारे लोग अंडरस्टेयर का मतलब नहीं समझते होंगे तो मैं उनको बता देता हूं कि जब आप एक फ्रंट व्हील ड्राइव गाड़ी को बहुत ज्यादा तेज चलाते हो और एकदम से मोड़ देते हो तो वह मुड़ने की बजाय सीधा चली जाती है यानी कि ग्रिप छोड़ देते हैं आई के टायर। इसे अंडरस्टयर कहा जाता है। और ऐसा तब भी होता है जब आप तेज ब्रेक सप्लाई करते हो और टर्न करते हो साथ में। स्मॉल सर्किट पे मेरे साथ एक बार थोड़ा सा ऐसा हुआ भी। यहां पर एक टाइट स्मॉल टर्न पर मैंने बहुत ज्यादा तेज की गाड़ी मोड़ी और क्विक टर्न लेते टाइम स्क्वीकिंग साउंड बहुत ज्यादा आई और ऐसा लगा कि गाड़ी थोड़ी सी अंडरस्टेड हुई है। लेकिन वो शायद इसलिए भी हुआ था क्योंकि मैं उस टर्न के लिए बहुत ज्यादा तेज चला रहा था गाड़ी। ट्रैक की बात करूं तो वहां पर भी टर्न्स पर ये गाड़ी बहुत ज्यादा अच्छे से हैंडल हो रही थी। जिस लेवल की ग्रिप्स ये गाड़ी के टायर्स प्रोवाइड करा रहे थे ना वो बहुत ज्यादा कमेंडेबल है। एटलीस्ट फोर डोर सेडान के हिसाब से बहुत ज्यादा अच्छा करा इसने उन टर्न्स के ऊपर। आई वाज़ एबल टू टर्न एट 80 ऑन सम टाइट टर्न्स। हां, टायर्स में से आवाज जरूर आती है, लेकिन गाड़ी बिल्कुल भी ग्रिप नहीं छोड़ती है। बिल्कुल भी ऐसा फील नहीं होता है कि आप कंट्रोल खो रहे हो। और यह इसकी प्रोग्रेसिव ब्रेक्स की वजह से भी होता है। आप ब्रेक दबाते जाओ और गाड़ी बिना रोड छोड़े रुकती चली जाती है। वैसे एबीएस और ईएसई ऐसे इलेक्ट्रॉनिक एड्स तो आपकी हेल्प करते ही हैं गाड़ी को कंट्रोल में रखने के लिए। लेकिन अगर टायर बेकार हो ना तो वो भी पॉसिबल नहीं हो पाता है। Skoda ने इस गाड़ी के अंदर काफी ज्यादा हाई परफॉर्मेंस टायर्स लगा रखे हैं। ब्रिज स्टोन के पोटेंसा इस गाड़ी के अंदर मिलते हैं जो कि 225 mm की अच्छी खासी विड्थ के साथ आते हैं। 19 इंच का इनका साइज है और 90 mm की साइड वॉल्स हैं। यानी कि काफी ज्यादा लो प्रोफाइल टायर्स हैं। ये जो परफॉर्मेंस टायर्स हैं, यह कंपैरेटिवली सॉफ्ट रबर के साथ आते हैं ताकि ट्रैक पर और हाई स्पीड्स पर आपको अच्छी खासी ग्रिप मिल सके। लेकिन इनका डाउन साइड यह होता है कि यह जल्दी वेयर आउट होते हैं और हमारे जो देश की देसी सड़कें हैं ना उन पर इनका क्या हाल होगा वह मैं थोड़ा सा अभी बता नहीं सकता हूं क्योंकि बहुत ज्यादा लो प्रोफाइल टायर हैं और ऐसे टायर्स जल्दी फटते हैं ऐसे चांसेस ज्यादा होते हैं इनके तो वो देखने वाली बात रहेगी या फिर आप जब चलाओगे आपको ध्यान रखना पड़ेगा थोड़ा चलाते वक्त आल्सो क्योंकि गाड़ी सिर्फ ट्रैक पे ही चलाई है और जो ट्रैक होता है वो तो स्मूथ होता ही है इसीलिए राइट क्वालिटी के बारे में नहीं बोल सकता हूं कार की परफॉर्मेंस और हैंडलिंग के बारे में जो मैंने बताया है उससे आप समझ गए होंगे कि आखिरकार क्यों इस गाड़ी की इतनी ज्यादा फैन फॉलोइंग है और क्यों इस गाड़ी की आते ही 100 की 100 यूनिट्स बिक गई। देखो आपको लग रहा होगा कि 100 तो बहुत छोटा नंबर है लेकिन आप इस चीज को समझो कि ऑक्टा कोई पगानी या कॉin जैसी गाड़ी नहीं है। इंडिया में कई गाड़ियां ऐसे ही बाहर से इंपोर्ट होती हैं और धूल खाती है शोरूम्स के अंदर। उनको कोई नहीं खरीदता है। Nissan की xl का यही हाल हुआ था। उनको बाद में बेचना पड़ा। आई डोंट नो कहां बेची उन्होंने। गाड़ियां बिकती नहीं रही थी शोरूम्स में और सिट्रन C5 भी खड़ी रहती है। एक भी यूनिट नहीं बिकती है पूरे-पूरे महीने। और इसीलिए ऐसी आते बिक जाना एक नॉन लग्जरी ब्रांड की गाड़ी के लिए बड़ी बात होती है। अच्छा इस बात से एक और सवाल निकल के आता है कि भैया Skoda सिर्फ इतनी ही गाड़ियां क्यों लेकर आया? अगर इंडिया में 100 ही गाड़ियां लानी थी तो इससे बढ़िया लाते ही ना। है ना? इसके पीछे एक बड़ा रीज़न अपने फ्लैशिप प्रोडक्ट को लाना दिखाई देता है। जिससे ब्रांड की जो एस्पिरेशनल वैल्यू है वह बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। और जैसी छोटी कार्स के ओनर्स भी यह बोल सकते हैं कि मैं उस ब्रांड की गाड़ी चलाता हूं जो कि ऑक्टा RS बनाता है। तो ऑक्टा RS के रिव्यु को थोड़ा सा अब कंक्लूड कर लेते हैं। मेरे हिसाब से यस यह गाड़ी थोड़ी सी ओवरप्राइज़्ड है क्योंकि डायरेक्ट इंपोर्ट है तो यह तो होना ही था और लिमिटेड कार्स आई है तो अब आपको यह मिलेगी भी नहीं। वो ओवर प्राइस है कि नहीं उसके लिए आपको टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। आप इस प्राइस पे चाहो तो यूज़्ड M340 या फिर S5 जैसी गाड़ियां ले सकते हो जो कि इससे ज्यादा पावरफुल फील होती हैं। लेकिन अगर मैं हैंडलिंग की बात करूं तो मेरे को नहीं लगता कि Skodavi RS को बहुत ज्यादा गाड़ियां पकड़ सकती हैं। S5 और M340i अगेन जैसे मैंने पहले ही बोला वही दो गाड़ियां ऐसी हैं जो शायद इतना अच्छा कर सकें। ऑक्टा RS बार्स को बहुत ज्यादा हाई सेट करती है व्हेन इट कम्स टू हैंडलिंग एंड डायनामिक्स। तो इस वीडियो में बस इतना ही। अगर आपको मेरी वीडियो पसंद आई तो प्लीज कंसीडर सब्सक्राइबिंग टू आवर चैनल। इस वीडियो को लाइक करिए, शेयर करिए और आपकी कौन सी फेवरेट परफॉर्मेंस सेडान है वो कमेंट्स के अंदर जरूर बताइए।

Performance sedans are dying, and EVs are to blame! With instant torque, crazy acceleration, and zero noise, electric cars are stealing the spotlight from petrol-powered machines. But there’s one ICE sedan that refuses to give up

The Skoda Octavia vRS.

In this video, we take a deep dive into what makes the vRS special — its turbocharged heart, DSG gearbox, and pure driver’s feel — and whether it can still justify its price against fast EVs like the BYD seal, TATA HARRIER EV, AND XEV 9E

#OctaviaVRS #FastEVs #PerformanceSedan #BiturboMedia
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