Electric Vehicles the future of automotive Industry ?
पूरी दुनिया के लीडर्स आज ग्लोबल वार्मिंग की लड़ाई में एकजुट हो चुके हैं गवर्नमेंट्स वर्ल्ड ओवर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को प्रमोट कर रही हैं एक एनवायरमेंट फ्रेंडली अल्टरनेटिव के रूप में यूरोपियन यूनियन ने तो 2035 के बाद कंबशन इंजन की सेल पर बैन लगा दिया है एंड
इंडिया में भी यह होना नियर फ्यूचर में तय ही है यानी यू मे हैव नो अदर ऑप्शन एक्सेप्ट टू बाय एन ईवी सो गाइ आज हम डिस्कस करेंगे ईवीज के बारे में क्या इलेक्ट्रिक व्हीकल्स एक्चुअली में हमारे प्लानेट के लिए बेनिफिशियल है या यह सब एक बड़े मार्केटिंग स्कैम के अलावा कुछ नहीं
है वेल इवीज में एक इलेक्ट्रिक मोटर के थ्रू पावर जनरेशन होती है जो इलेक्ट्रिकल एनर्जी को कन्वर्ट करता है मैकेनिकल एनर्जी में इन मोटर्स में हाई पावर्ड बैटरीज यूज होती हैं एंड ज्यादातर ईवीज लिथियम आयन बैटरी से बनी होती हैं सो क्वाइट नेचुरली आपको इन बैटरीज को चार्ज
करना पड़ेगा या तो एक्सटर्नल सोर्सेस पर या फिर घर पर अब ईवीज पर स्विच करने के कुछ फायदे भी हैं इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में कन्वेंशनल इंजन ना होने की वजह से किसी भी प्रकार का साउंड नहीं होता सो इनसे साउंड पोल्यूशन कम रहता है और सिंस ईवीज के चलने
से किसी तरह की हार्मफुल गैसेस भी नहीं निकलती एस सच इन्हें एक एनवायरमेंटली क्लीन मोड ऑफ ट्रांसपोर्टेशन माना जाता है अब इंडियन सिनेरियो को देखते हुए दुनिया की मोस्ट पोल्यूटेड सिटीज में हमारे देश की पांच मेजर सिटीज हमेशा ही आती हैं सो इस फ्रंट पर भी ईवीज हमारे लिए मददगार
साबित होंगी एंड इसी सोच के तहत गवर्नमेंट ने 2030 तक इंडियन मार्केट में ईवीज का शेयर 30 पर तक करने का टारगेट रखा है और इसके लिए गवर्नमेंट ईवी पर सब्सिडी भी प्रोवाइड कर रही है तो चलिए अब डिस्कस करते हैं एलिफेंट इन द रूम क्या ईवी
एक्चुअली में एमिशन फ्री है अब एक इलेक्ट्रिक व्हीकल तभी एनवायरमेंटली बेनिफिशियल है जब गाड़ी को चार्ज की जाने वाली इलेक्ट्रिसिटी का जनरेशन भी ग्रीन रिन्यूएबल सोर्सेस से हो हो लेकिन आज भी भारत की इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन में कोल बेस्ड थर्मल पावर प्लांट्स का मैक्सिमम शेयर है अब एक तरफ तो गवर्नमेंट ग्रीन
एनर्जी के बड़े-बड़े प्लांस बना रही है वहीं दूसरी तरफ हाल ही में गवर्नमेंट ने बहुत से कोल माइंस के ऑक्शन किए जिसमें कुछ नॉन ऑपरेशनल कोल माइंस भी थी अब यह तो फर्क हो गया ना कथनी और करनी में अब गवर्नमेंट की ही एक रिपोर्ट के तहत तो वह
खुद एस्टीमेट कर रही है कि इलेक्ट्रिसिटी की बढ़ती डिमांड को पूरा करने के लिए बाय नेक्स्ट डिकेड हमारे देश को बिलियन टंस ऑफ कोयले की जरूरत पड़ने वाली है जी हां बिलियन टंस ऑफ कोयला जिसका एक मेजर हिस्सा ईवीज को चार्ज करने में ही लगेगा फर्द
एक्सपर्ट्स एक कंसर्न्स भी जता रहे हैं कि ईवीज के एडॉप्शन से मेट्रोस का कार्बन एमिशन तो कम हो जाएगा लेकिन इसकी कीमत कहीं रूरल एरियाज को ना चुकानी पड़े ईवीज इंडियन मार्केट में आज भी उनके पेट्रोल डीजल काउंटर पार्ट से महंगी ही है एंड इसका मेजर रीजन है उनमें में यूज की जाने
वाली लिथियम आयन बैटरीज और इन बैटरीज में यूज होने वाला 70 पर लिथियम आयन हम चाइना से एक्सपोर्ट कराते हैं जो कि एक मेजर रोड ब्लॉक है हमारे लिए डोमेस्टिक कॉस्ट एफिशिएंट ईवीज बनाने में पिछले साल फरवरी 2023 में लिथियम के लार्ज डिपॉजिट्स मिले थे जम्मू एंड कश्मीर में जो भारत को
लिथियम आयन जनरेशन के मामले में ग्लोबल लेवल पर चाइना के बराबर लाकर खड़ा कर सकता है लेकिन यह इतना आसान नहीं होने वाला जेएन के में मिले डिपॉजिट्स हार्ड रॉक्स की शेप में है जिनसे लिथियम का एक्सट्रैक्शन करना थोड़ा मुश्किल रहेगा एंड देन माइनिंग से आने वाले एनवायरमेंटल
डेव पेशन का जे एन के के फ्रेजा इकोसिस्टम पर क्या इफेक्ट पड़ेगा उसका तो अंदाजा ही नहीं लगाया जा सकता अब आते हैं ईवीज में इस्तेमाल होने वाली बैटरीज पर अगर ईवीज की बैटरीज में आग लग जाए तो भैया यह तो बुझाए ना बुझे इन
बैटरीज में जब तक चार्ज रहता है तब तक इनमें दोबारा आग लगने का खतरा बना ही रहता है और इन ईवीज का डिजाइन कुछ इस तरह का है कि बैटरीज ड्राइवर और पैसेंजर सीट के नीचे होती हैं अब ईवीज की लॉन्जे विटी एंड ड्यूरेबल पर भी सवाल बने हुए हैं इनकी
रेंज भी कम ही होती है एंड चार्ज करने में भी आधे से एक घंटा लग ही जाता है जिससे इनकी रीत सिर्फ मेट्रो सिटी तक ही लिमिटेड ना रह जाए फर्द यह टेक्नोलॉजी अभी अपने नेसें यानी बिगिनिंग स्टेज पर है तो अगर गवर्नमेंट्स इन्हे सब सब्सिडाइज ना करें
तो मैन्युफैक्चरर्स के लिए इन्हें बनाना एक कॉस्ट इफेक्टिव एंडेवर नहीं है अब इमेजिन कीजिए भारत जैसे देश में अगर सब के सब लोग ईवीज पर मूव कर जाते हैं तो क्या इस डिमांड को पूरा करने के लिए हमारे देश के पास इतनी चार्जिंग कैपेसिटी है एक
फाइनल कंसर्न इनके वेस्ट को लेकर भी है जैसा कि आप जानते ही हैं कि प्लास्टिक भी सिर्फ 2 पर तक ही रिसाइकल हो पाता है सो इसकी क्या गारंटी है कि यह बैटरीज भी पूरी तरह से रिसाइकल हो सकेंगी यह सब देखने के बाद आपको क्या लगता है कि कहीं हम
जल्दबाजी तो नहीं कर रहे जैसे कि एक दशक पहले भी हुआ था डीजल कार्स के इंट्रोडक्शन के साथ toyota’s अकेला सॉल्यूशन नहीं है कार्स को एनवायरमेंट फ्रेंडली बनाने का और वह अपने हाइब्रिड मॉडल्स के साथ-साथ और टेक्नोलॉजीज को भी एक्सप्लोर कर रहा है अब वर्ल्ड ओवर पॉलिटिशियन बड़े-बड़े वादे तो
कर रहे हैं रिगार्डिंग सेविंग द एनवायरमेंट बीइंग कार्बन न्यूट्रल लेकिन इस सब का एक छोटा सा सलूशन भी हो सकता है जो शायद हम सब कहीं ओवर लुक कर रहे हैं पब्लिक ट्रांसपोर्ट जी हां इंप्रूविंग पब्लिक ट्रांसपोर्ट यह एक अल्टरनेटिव बन सकता है इंस्टेड ऑफ 100 लोग अपनी अपनी 100
गाड़ियां लेकर रोड्स पर निकलें वो लोग एक रिलायबल एंड एफिशिएंट पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम का यूज कर सकते हैं जिससे प्रॉब्लम ऑफ ओवर क्राउडेड रोड्स कंजेशन इनमें कमी लाई जा सकती है और साथ ही साथ यह एनवायरमेंटली बेनिफिशियल भी होगा विदाउट स्लोइंग डाउन अवर ग्रोइंग इकॉनमी अब गाइस आपका क्या ख्याल है ईवीज
को लेकर डू शेयर योर कमेंट्स वीडियो पसंद आया तो चैनल को लाइक एंड सब्सक्राइब जरूर करें धन्यवाद
#electricvehicle #evs #storiesinhindi #india #automation #automative #autoindustry #cars #carslover #internalcombustionengine #oilandgas #