Why Most INDIANs are Ignoring These “Ev” Financial Traps? | Learn How to Buy an EV!
जब आप एक पेट्रोल या डीजल वाली कार या फिर पेट्रोल से चलने वाला टू व्हीलर खरीदने का प्लान बनाते हो तो आप सबसे पहले उसके बारे में रिव्यूज देखते हो। ब्रांड के बारे में थोड़ा सा समझने की कोशिश करते हो कि कैसा है। फिर सीधा आप शोरूम जाते हो, टेस्ट ड्राइव करते हो और जो गाड़ी पसंद आती है उसको बुक करा लेते हो। आप ₹1 लाख से लेकर ₹50 लाख तक की गाड़ी कुछ नोन फैक्ट्स और अपनी इंट्यूएशन के बेसिस पे खरीद लेते हो। और यह आप इतने कॉन्फिडेंस के साथ इसलिए कर पाते हो क्योंकि यह जो आइस व्हीकल्स हैं यह लगभग 100 साल से एक्सिस्ट कर रहे हैं। तो इसीलिए आपको पता होता है कि आपकी नीड्स के हिसाब से कौन सी गाड़ी आपके लिए सही रहेगी और आपको एक आइस व्हीकल ओन करने के लिए किस-किस तरीके से रेडी होना होगा। बट व्हेन इट कम्स टू ईवीज। आज भी बहुत सारे लोग इनके बारे में ठीक से नहीं जानते हैं। कई लोग अभी भी नहीं समझते हैं कि एक ईवी खरीदते टाइम सिर्फ बैटरी का साइज ही नहीं देखा जाता है। बल्कि बैटरी की वारंटी में छुपे हुए हिडन क्लॉज़ को भी देखना होता है जिनकी वजह से आपकी वारंटी एक्चुअली वॉइड हो सकती है। घर में फास्ट चार्जर सिर्फ ऐसे ही नहीं लग जाता है बल्कि आपको डिस्ककोम से अपना लोड बढ़वाना पड़ता है। और ऐसी कई सारी बातें हैं जो लोगों को ईवीज के बारे में नहीं पता है। अब क्योंकि ईवीज की ओनरशिप के बारे में ज्यादातर लोग नहीं समझते हैं। इसीलिए आई डिसाइडेड टू मेक दिस वीडियो जिसमें हम एक-एक पैरामीटर की बात करेंगे फ्रॉम बैटरी टू इंफ्रा और जानेंगे कि एक आम ईवी बायर को क्या-क्या ध्यान में रखने की जरूरत होती है एक ईवी खरीदते टाइम। देखो एक ईवी लेने के पीछे कुछ तीन से चार प्रैक्टिकल औरेंट रीज़ंस हो सकते हैं। एक तो यह कि जो इनकी रनिंग कॉस्ट होती है वो आइस व्हीकल्स के मुकाबले बहुत ज्यादा कम होती है। बहुत ज्यादा पैसा बचता है इनको चलाने में। दूसरा यह कि यह बहुत ही ज्यादा स्मूथ होती है और तीसरा यह कि यह बहुत ही ज्यादा क्विक होती है। एक मास मार्केट ईवी भी बहुत ज्यादा तेज फील होती है। लेकिन इन खूबियों के बाद भी रेंज एंजाइटी एक ऐसी चीज है जो कई लोगों को इनसे दूर करती है। जब से ईवीज मार्केट में आई हैं तब से अपने साथ एक नया टर्म भी लेकर आई हैं और वो है रेंज एंजायटी। फिलहाल के सालों में रेंज एंजाइटटी ईवीज की ग्रोथ की सबसे बड़ी दुश्मन रही है और ईवी इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ा बॉटल लाइक। लेकिन क्या आज 2025 में भी सिर्फ रेंज एंजाइटटी की वजह से आपको एक ईवी की तरफ नहीं जाना चाहिए? क्योंकि आज की डेट में तो ऐसी कई सारी ईवीज हैं जो कई सैकड़ों किलोमीटर्स कवर कर सकती हैं सिर्फ एक चार्ज में। तो रेंज एंग्जायटी का डर आपको सताना चाहिए या फिर नहीं यह डिपेंड करता है आपके इलेक्ट्रिक व्हीकल पर और आपकी किस टाइप की यूसेज है। अगर आप सिर्फ सिटी ड्राइविंग के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल ढूंढ रहे हो और आपका जो डेली ट्रैवल है वो 50 से 60 कि.मी. का ही रहता है। तो आप एक इलेक्ट्रिक कार और एक इलेक्ट्रिक टू व्हीलर दोनों ही कंसीडर कर सकते हो। इलेक्ट्रिक कार्स में अगर हम बेसिक से बेसिक गाड़ी को देखें जैसे कि Tiago EV को तो उसका जो बेस वेरिएंट है वह 223 कि.मी. की क्लेम रेंज के साथ आता है। और अगर हम इसकी रियल वर्ल्ड रेंज 160 कि.मी. के आसपास भी मान के चलें तो यह गाड़ी एक चार्ज में आपकी दो से तीन कंफर्टेबल ऑफिस राउंड ट्रिप्स करवा देगी। जिसके बाद आपको चार्जर ढूंढना पड़ेगा। अब अगर आप एक ऐसी सोसाइटी या फिर स्टैंड अलोन हाउस में रहते हो जहां आप अपनी पार्किंग में ही चार्जर इंस्टॉल कर सकते हो। तो आप एक्चुअली में लो रेंज इलेक्ट्रिक कार भी ले सकते हो बड़ी आराम से। स्पेशली तब जब आपको कभी भी शहर से बाहर नहीं जाना होता है और मोस्टली आप एक फिक्स्ड राउट पर ही अपनी गाड़ी को चलाते हो। लेकिन अगर आप एक ऐसे एरिया में रहते हो जहां पर आपको अपनी कार रोड पर ही खड़ी करनी पड़ती है। यानी कि ऐसी जगह जहां पर आप चार्जर को इंस्टॉल नहीं कर सकते हो। देन आपको एक ऐसी गाड़ी लेनी चाहिए जिसकी जो रेंज है वो ज्यादा हो। जैसे कि MG की जो Windsर EV है, अगर उसके बेस वेरिएंट्स वगैरह भी देख लें तो उनमें 332 कि.मी. की क्लेम रेंज तो मिल जाती है। वैसे ही जो Nexon EV के जो लॉन्ग रेंज वाले वेरिएंट्स आते हैं वो भी लगभग 400 कि.मी. पार कर जाते हैं। और ऐसे ही इनके भी जो ऊपर लॉन्ग रेंज वाली गाड़ियां हैं उनको आप चूज़ कर सकते हो। और मैं ऐसा इसलिए बोल रहा हूं क्योंकि इवन इन सिटी कम्यूट्स कई बार आपके साथ ऐसा होगा कि आपके पास कमर्शियल चार्जर के पास तक जाने का टाइम नहीं होगा। क्योंकि फास्ट चार्जिंग के अंदर भी 45 मिनट से 1 घंटा तो लग ही जाता है जिसमें भी कार पूरी नहीं भरती है। 80% तक ही चार्ज हो पाती है। और फिर अगर आप ऑफिस के लिए ऑलरेडी लेट हो रहे हो ऊपर से या तो चार्जर जो है वो चल नहीं रहा है या फिर बिजी है ऑलरेडी कोई गाड़ियां खड़ी हुई है तो उस कंडीशन में आप फंस जाओगे। इसीलिए अगर आप घर में चार्जर नहीं लगवा सकते हो तो लॉन्ग रेंज वाली गाड़ी लो। क्योंकि एक बार चार्ज करने में आपके चार-प दिन निकल जाएंगे। तो आपके पास अच्छा खासा बफर टाइम होगा कि बीच में जिस दिन आप खाली हो उस दिन चार्ज कर लो। लेकिन अगर आपको सिर्फ डेली ऑफिस कम्यूट्स के लिए या फिर सिटी यूज़ के लिए एक इलेक्ट्रिक स्कूटर या फिर इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल लेनी है तो यहां पर आप बिना ज्यादा सोचे समझे इनको ले सकते हो क्योंकि ज्यादातर लोग अपने इलेक्ट्रिक टू व्हीलर्स को घर में ही चार्ज कर सकते हैं। इवन इफ दे आर लिविंग इन अ कंजेस्टेड एरिया क्योंकि छोटे होते हैं ना कहीं पे भी खड़े हो जाते हैं। तो अगर आपको 30 से 40 कि.मी. ही चलना होता है दिन में तो आप एक 70 से 80 कि.मी. तक की रियल वर्ल्ड रेंज वाला टू व्हीलर भी खरीद सकते हो। इसके बाद अगर हम बात करें हाईवे यूज़ की तो इलेक्ट्रिक टू व्हीलर तो इस मामले में बिल्कुल आउट हो जाते हैं क्योंकि इनकी रेंज ही 150 कि.मी. के आसपास होती है। ज्यादातर जो अभी मार्केट के अंदर टू व्हीलर्स अवेलेबल हैं। तो अगर आपको लंबा जाना है तो आपको कई बार चार्ज करना पड़ेगा और इतने भी चार्जर फ्रीक्वेंटली अवेलेबल नहीं होते हाईवेज पे और आपका जो ट्रिप है उसका टाइम बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा। तो इलेक्ट्रिक टू व्हीलर्स तो इस मामले में बिल्कुल बाहर हो जाते हैं। लेकिन अगर आप एक लॉन्ग रेंज इलेक्ट्रिक कार लेते हो तो ऐसा आप कर पाओगे। स्पेशली ऐसी गाड़ियां जिनकी जो रियल वर्ल्ड रेंज है वह 380 कि.मी. से ज्यादा है। लेकिन हां आप कहां जा रहे हो? चार्ज लेने के लिए कहां स्टॉप करोगे या फिर किस तरीके का रूट पकड़ोगे कि आपकी गाड़ी चार्ज हो सके यह सब कुछ आपको प्लान करना पड़ेगा। यानी एक लॉन्ग रेंज वाली इलेक्ट्रिक कार को आप मोस्टली सिटी के लिए यूज़ कर सकते हो और ओकेजनली आप छोटे-मोटे ट्रिप्स भी मार सकते हो। रेंज के बाद बात करते हैं बैटरीज की क्योंकि यह आपकी गाड़ी की रेंज पर डायरेक्टली असर डालती हैं और ईवीज में बैटरी उतनी ही इंपॉर्टेंट होती हैं जितना कार्स में इंज क्योंकि यह एक इलेक्ट्रिक व्हीकल का सबसे महंगा पार्ट होता है और गाड़ी की टोटल कॉस्ट में 40% कॉस्ट तो सिर्फ बैटरी की होती है। इसीलिए आपको श्योरिटी होनी चाहिए कि आपको बैटरी पर लंबी वारंटी मिले। एंड ऐसा कुछ हो भी रहा है। ब्रांड्स अपनी ईवीज पर 8 से 10 साल तक की वारंटीज दे रहे हैं और उसमें भी आप इन ईवीज को डेढ़ से 2 लाख कि.मी. तक चला सकते हो। और कई ब्रांड्स तो लाइफटाइम वारंटी तक दे रहे हैं। लेकिन आपको यह समझने की जरूरत है कि कोई भी लाइफटाइम वारंटी लेजिड लाइफ टाइम वारंटी नहीं होती है। ऐसा नहीं है कि आप जब तक जिंदा रहोगे तब तक आपको वारंटी मिलती रहेगी अपनी गाड़ी पर। बल्कि यहां पर कुछ टर्म्स एंड कंडीशंस हैं जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए। यहां पर लाइफ टाइम का मतलब है सिर्फ 15 साल। यानी कि सिर्फ वो पीरियड जब आपकी कार या फिर टू व्हीलर फर्स्ट टाइम रजिस्टर होते हैं। उसके बाद नहीं मिलेगी आपको वारंटी। फिर कुछ ब्रांड्स अपनी वारंटी में अनलिमिटेड किलोमीटर्स को मेंशन करते हैं। और यहां पर अनलिमिटेड का मतलब ट्रू अनलिमिटेड हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता। यहां पर फेयर यूसेज को देखा जाता है। ऐसा नहीं है कि आपको अनलिमिटेड किलोमीटर की वारंटी मिली है तो आप अपनी गाड़ी को टैक्सी बना के चलाओ। मतलब ऐसा आप पर्सनली यूज़ करो जितना प्रैक्टिकली यूज़ कर सकते हो उतना। वैसे ही आपको बैटरी की स्टेट ऑफ हेल्थ गिरने पर रिप्लेसमेंट और रिपेयर्स प्रोवाइड कराए जाते हैं वारंटी के अंदर। लेकिन यहां पर भी एक चीज देखने वाली होती है और वो यह है कि जो वारंटी के अंदर कमिटेड टाइम दिया गया है जैसे कि 8 साल या फिर 10 साल उस पीरियड के अंदर अगर आपकी बैटरी की हेल्थ 80% से नीचे होगी ना तभी आपको वारंटी मिलेगी। जैसे कि यहां पर मेंशंड है कि एसओएस 70% से नीचे जाने पर ही वारंटी आप क्लेम कर पाओगे। वैसे ही जो एथर है वो भी 8 साल में 70% स्टेट ऑफ चार्ज की अश्योरेंस देती है। यानी जब आप एक ईवी खरीदने का प्लान बनाओ तो उसमें मिलने वाली वारंटी के टर्म्स एंड कंडीशन को ध्यान से पढ़ो। हो सकता है जो चीजें आप उम्मीद लगा रहे हो वो आपकी उम्मीद से अलग हो। बैटरी के बात समझो सेफ्टी के बारे में भी। क्योंकि एक वक्त था जब ईवी बैटरी में लगने वाली आग की वजह से लोग बहुत ज्यादा डरते थे। जिसकी वजह से ईवीस को अनसेफ मान लिया गया था। और वह मोस्टली होता इसलिए था क्योंकि कई सारे इंडियन ब्रांड्स बाहर से चीप चाइनीस ईवीस को इंपोर्ट करते थे और डायरेक्टली अपना लोगो चेंज करके यहां पर बेचने चालू कर देते थे। यहां कुछ ब्रांड्स को बहुत ही ज्यादा जल्दी थी। उन्होंने बिना प्रॉपर आरएडी के ही अपने स्कूटर्स को मार्केट में ल्च कर दिया जिसकी वजह से कभी उनके स्कूटर उल्टे भाग रहे थे तो कभी रुक ही नहीं रहे थे। लेकिन अब ऐसी चीजें बहुत ज्यादा कम हो गई हैं क्योंकि इंडिया के जो ब्रांड्स हैं वह अपनी ईवीस के आरएडी पर बहुत ही ज्यादा इन्वेस्ट कर रहे हैं और कुछ ब्रांड्स तो सेफ्टी के मामले में बिल्कुल नेक्स्ट लेवल जा चुके हैं और ईवीस का जो ट्रू पोटेंशियल है सेफ्टी को लेकर उसको अनलीच कर चुके हैं। जैसे कि एथर पोर्टल डिटेक्शन और क्रैश अलर्ट जैसे फीचर्स दे रहे हैं अपनी स्कूटर के अंदर जिसकी वजह से राइडर को सिक्योर फील होगा। लेकिन फिर भी क्रैश होने के चांसेस तो हैं ही क्योंकि है तो यह टू व्हीलर ही। तो रेगुलर टू व्हीलर्स की इन्हीं दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए हमारे देश की खुद की उभरती हुई कंपनी आईगo मार्केट के अंदर थ्री व्हील लीन स्कूटर्स लेकर आई है। जिनमें दो की जगह तीन व्हील्स लगे हुए हैं। लेकिन फिर भी यह आपके साइडवेज मोशन के साथ लीन होते हैं। और यह एंटी टॉपिंग टेक्नोलॉजी के साथ भी आते हैं। यानी यह काफी ज्यादा सेफ है जिस चलते इन्हें घर के एल्डर्स और कम उम्र के लोग भी आराम से चला सकते हैं बिना डरे। और वो इसलिए भी क्योंकि इनमें ऑन डिमांड सेल्फ बैलेंसिंग मिलती है। वो भी बिना किसी महंगे और एनर्जी ट्रेनिंग चाहिएस के। इन स्कूटर्स में रियर में टू व्हील्स दिए गए हैं। जिस चलते यह पोर्ट होल्स और बढ़िया रोड ग्रिप देते हैं और काफी ज्यादा लोड उठा सकते हैं विद कंफर्ट। और इन स्कूटर्स के रियर व्हील्स में ड्यूल व्हील ड्राइव भी मिलता है। जिस चलते बहुत ही ज्यादा अच्छा ट्रैक्शन और टॉर्क निकाल के देते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं इसमें मिलने वाले ट्रिपल डिस्क इसकी सेफ्टी को और भी ज्यादा बढ़ा देते हैं। जो कि सीबीएस यानी कि कंबाइन ब्रेकिंग सिस्टम के साथ इक्विप्ड है। सच बोलूं तो मैंने पहली बार तीन डिस्क ब्रेक वाला व्हीकल देखा है। इन स्कूटर्स में एलएफपी और एलएमएफ बैटरीज मिलेंगी जो कि हर वेदर के लिए सूटेबल है। यह स्कूटर सिर्फ 90 मिनट में घर के अंदर ही चार्ज हो सकते हैं और एक बार चार्ज होने पर 70 कि.मी. की रियल वर्ल्ड रेंज निकाल के दे सकते हैं। ico के यह स्कूटर अपने थ्री व्हील डिज़ाइन और एंटी टॉपर टेक्नोलॉजी की वजह से बहुत ज्यादा सेफ तो है ही। साथ ही साथ यह अपने डिज़ाइन और स्ट्रांग स्पेस स्टील फ्रेम शैसी की वजह से बहुत ही ज्यादा मजबूत भी है। जिस चलते इसे स्मॉल बिजनेस ओनर्स आराम से अपने कामों के लिए यूज कर सकते हैं। तो अगर आप भी इंटरेस्टेड हो तो डिस्क्रिप्शन में दिए गए लिंक पर क्लिक करो और प्री बुकिंग कराओ। अगर आप बेंगलुरु, हैदराबाद और महाराष्ट्र से हो तो पहले 30 कस्टमर्स को 30% डिस्काउंट मिलेगा। एक इवी के लिए चार्जिंग स्पीड्स भी बहुत ज्यादा मैटर करती है क्योंकि इससे आपका वक्त बचता है। यूजुअली तीन टाइप के चार्जरस होते हैं। एक एसी स्लो चार्जर जो आपको गाड़ी के साथ मिलता है और बहुत धीरे-धीरे चार्ज करता है। 12 13 घंटे लग जाते हैं उसे गाड़ी को चार्ज करने में। एक एसी फास्ट चार्जर होता है जो आप अपने घर में भी लगवा सकते हो। आपको वो ब्रांड से अलग से खरीदना पड़ता है या फिर आप एक थर्ड पार्टी ब्रांड से भी खरीद सकते हो। इसको प्रोफेशनली इंस्टॉल करवाना होता है और यह आपकी गाड़ी को 4 से 6 घंटे में चार्ज कर सकता है डिपेंडिंग अपॉन द व्हीकल यू हैव। और तीसरे चार्जर होते हैं डीसी फास्ट चार्जर जो आपकी गाड़ी को 80% तक सिर्फ 1 घंटे में भी चार्ज कर सकते हैं। अब यह जो डीसी चार्जर होते हैं इंडिया के अंदर 25 से लेकर 200 किलोवाट तक ज्यादा पाए जाते हैं। इस स्पीड पर ये चार्ज कर सकते हैं। और इनमें जो 200 किलोवाट वाले चार्जर्स होते हैं यह सबसे ज्यादा तेजी से चार्ज करते हैं आपकी गाड़ी को जो कि इस नंबर को ही सुन के समझ में आता है। लेकिन चार्जर का ही अकेला फास्ट होना जरूरी नहीं है। आपकी कार के अंदर चार्जिंग इनपुट भी इस तरीके का होना चाहिए कि वह 200 किलोवाट तक की चार्जिंग को ले सके। मान लो अगर आपकी गाड़ी सिर्फ 50 किलो वाट तक की स्पीड की चार्जिंग को सपोर्ट कर सकती है। तो इस कंडीशन में अगर आप 200 किलो वाट वाले चार्जर पे भी अपनी गाड़ी को चार्ज करोगे तब भी वो चार्जर आपकी गाड़ी को सिर्फ 50 किलो वाट की स्पीड पर ही चार्ज करेगा। बाकी की जो चार्जिंग स्पीड है उसको आप यूटिलाइज नहीं कर पाओगे। तो इसीलिए यह जरूर देखो कि जो इलेक्ट्रिक व्हीकल आप लेने जा रहे हो वह किस रेट पर चार्ज हो सकता है। जैसे कि अगर मैं विंडवी की बात करूं तो यह गाड़ी 45 kवाट तक की डीसी फास्ट चार्जिंग को एक्सेप्ट कर सकती है। जिसके चलते यह 55 मिनट में 20 से 80% तक चार्ज हो सकती है। वहीं अगर हम Tata harier ईवी की बात करें तो यह 120 kवाट तक की स्पीड्स को एक्सेप्ट कर सकती है। जिस चलते यह 20 से लेकर 80% सिर्फ 25 मिनट में चार्ज हो जाती है। और वहीं अगर हम XUV 9 की बात करें तो यह 180 किलवाट तक की डीसी फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट कर सकती है और 20 से 80% सिर्फ 20 मिनट के अंदर चार्ज हो सकती है। अब वैसे तो यह जो टॉप एंड वाले डीसी फास्ट चार्जर होते हैं यह हर जगह अवेलेबल नहीं होते हैं स्पेशली इंडिया में। लेकिन जो हमारा EV का इंफ्रा है वो धीरे-धीरे बढ़ ही रहा है और आने वाले टाइम में जो गाड़ियां ज्यादा जल्दी चार्ज हो सकती है ना उनको इनका बेनिफिट ज्यादा मिलेगा। वो लोग ज्यादा फायदे में रहेंगे। आल्सो अगर हम बात करें एसी फास्ट चार्जर की जो कि घर में ही इंस्टॉल करा जा सकता है और आपकी गाड़ी को सिर्फ 4 से 6 घंटे के अंदर चार्ज कर सकता है। तो यह बहुत बढ़िया इन्वेस्टमेंट है क्योंकि आपको इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन इसमें आपको यह ध्यान में रखने की जरूरत पड़ेगी कि जो आपका सेंशंड इलेक्ट्रिक लोड हो वो 7 किलो वाट से कम का ना हो। अगर कम है तो आपको इस कंडीशन में डिस्कॉम से लोड एनहांसमेंट के लिए बोलना पड़ेगा। इसके बाद आती है परफॉर्मेंस। ईवी के साथ मुझे एक चीज बहुत ज्यादा अच्छी यह लगती है कि आप बजट में ही बहुत ज्यादा तेज चलने वाली इलेक्ट्रिक कार खरीद सकते हो। क्योंकि इलेक्ट्रिक मोटर्स 0 आरपीएम से ही फुल टॉर्क डिलीवर करती हैं। और अगर हम इसके कुछ प्राइम एग्जांपल देखें तो जो Harrier EV है वह 30 लाख में ही ऑलमोस्ट 400 बीएp की पावर डिलीवर कर रही है। और यह आइस कार्स के साथ कभी भी पॉसिबल नहीं था इस प्राइस पॉइंट पे। तो अगर आपको तेज चलने वाली गाड़ियां पसंद है तो आपको EV जरूर पसंद आएंगी। लेकिन टू व्हीलर्स के मामले में चीजें थोड़ी सी अलग हो जाती हैं। इनमें ना क्योंकि कैटेगरीज बटी हुई है। क्विक तो यह सारे के सारे ही हैं। मतलब जल्दी एक्सलरेट करते हैं। लेकिन ना इनमें स्पीड के कैप्स लगे हुए हैं। उनकी कैपेसिटी के हिसाब से। जैसे कि लो स्पीड इलेक्ट्रिक टू व्हीलर्स आते हैं जो सिर्फ 25 किमी पर आर तक की स्पीड से चल सकते हैं। जिनके लिए यूजुअली किसी भी तरीके के लाइसेंस की जरूरत नहीं होती है। फिर आते हैं मिड स्पीड स्कूटर्स जो कि 45 से 60 किमी पर आर तक की हाई स्पीड तक चल सकते हैं। और फिर आते हैं 70 से 100 कि.मी. या फिर उससे ऊपर की स्पीड से चलने वाले स्कूटर्स या फिर टू व्हीलर्स जिनको आप हाई स्पीड इलेक्ट्रिक टू व्हीलर्स बोल सकते हो। अब अगर आपका डेली कम्यूट सिर्फ 25 से 30 कि.मी. के आसपास का ही है तो आप एक मिड स्पीड स्कूटर ले सकते हो या फिर बाइक ले सकते हो। और अगर आपका इससे ज्यादा है तो तेज चलने वाले टू व्हीलर्स तो वैसे अवेलेबल है ही। EV का एक बड़ा एडवांटेज यह भी होता है कि इनकी मेंटेनेंस काफी कम होती है क्योंकि इनके अंदर इंजन नहीं होता तो ऑयल चेंज नहीं करना पड़ता। क्लच एंड गियर सिस्टम नहीं होता तो मेंटेनेंस बहुत ज्यादा कम हो जाती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपकी मेंटेनेंस जीरो हो जाती है। टाइम टू टाइम आपको कूलेंट चेंज करना पड़ता है। ब्रेक पैड इंस्पेक्शन होता है और सॉफ्टवेयर अपग्रेड वगैरह सब कुछ करवाने पड़ते हैं। और मेंटेनेंस की बात हो रही है तो एक ईवी खरीदने से पहले आपको दो चीजें जरूर पता होनी चाहिए। पहली तो यह कि जो सर्विस सेंटर्स हैं उनकी अवेलेबिलिटी ठीक हो। इंडिया में अभी कई सारे ईवी ब्रांड्स बहुत ज्यादा नए हैं। जैसे कि BYD या फिर जो विनst आया है वह या फिर MGB अभी बहुत ज्यादा पुराना नहीं है। तो यहां पर यह कंसीडर करने की जरूरत बहुत ज्यादा है कि टिएर टू और टियर थ्री सिटीज में इनके जो सर्विस सेंटर वगैरह हैं वह बहुत ज्यादा शायद ना हो। क्योंकि यह जो ईवीज होती है ना यह आपके पास के गैराज में जाकर ठीक नहीं हो सकती क्योंकि ज्यादातर चीजें इलेक्ट्रिकल ही हैं इनमें और सॉफ्टवेयर ड्रिवन है और जो सॉफ्टवेयर होते हैं उनके राइट्स ब्रांड्स के पास ही होते हैं। पॉइंट नंबर दो जो आपको कंसीडर करना होगा वो यह है कि आप एक मेंटेनेंस पैकेज भी जरूर ले लो क्योंकि कई सारी ईवीज अभी बहुत ज्यादा नहीं है तो यह सरदर्दी आपके ऊपर नहीं आनी चाहिए। लास्ट बट नॉट द लीस्ट रीसेल वैल्यू एक ऐसा फैक्टर है जो आपको एक इलेक्ट्रिक व्हीकल या स्पेशली अगर मैं बोलूं तो इलेक्ट्रिक कार खरीदते टाइम जरूर ध्यान में रखना चाहिए। इलेक्ट्रिक गाड़ियां परचेस करते टाइम काफी ज्यादा महंगी होती है। लेकिन इस बात के बावजूद भी इनकी मार्केट के अंदर जो रीसेल वैल्यू है वह थोड़ी आइस व्हीकल के मुकाबले कम होती है। क्योंकि अभी क्या है अभी भी ईवीस काफी ज्यादा नहीं है और लोगों के मन में अनसर्टेनिटी है। इसीलिए जो इनकी रीसेल वैल्यू है वो उतनी ज्यादा अच्छी नहीं है जितनी आइस के लिए मिल जाती है आपको। स्पेशली कार्स की बात कर रहा हूं यहां पे। तो आप एक इलेक्ट्रिक कार लेते टाइम इस बात को कंसीडरेशन में जरूर रखो कि क्या आपके लिए मैटर करता है क्योंकि कई सारे लोग बहुत जल्दी-जल्दी गाड़ियां बदलते हैं। ऐसे में कम रीसेल वैल्यू वाली गाड़ी आपको फाइनेंसियली बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है। तो यही थी हमारी आज की वीडियो। अगर आपको मेरी वीडियो पसंद आई तो प्लीज कंसीडर सब्सक्राइबिंग टू आवर चैनल। इस वीडियो को लाइक करिए, शेयर करिए और Instagram पे भी मेरे को फॉलो करो। सपोर्ट दिखाओ वहां पर भी। बहुत ज्यादा अच्छी-अच्छी रील्स डालता हूं वहां पे। थैंक यू।
iGoWise Mobility(iGo), India’s world’s first smart electric leaning trike developer that doesn’t require a 3W license or extra parking space.
iGowise Mobility builds rugged, intelligent EV platforms tailored to urban India and Rural Bharat. BeiGo is the first electric pickup Trike in its product line, aiming to bridge the gap between two-wheelers and oversized expensive vehicles, equipped with patented anti-topple leaning technology for enhanced ease of handling, cornering, and ride comfort and with real-world profitability in mind.
The first product in its line, the BeiGo X4 Rugged Utility Vehicle, is ready for pre-bookings!
Please visit the website www.igowise.com to express your interest and participate in the competition to win a BeiGo absolutely free!
Use Referral Code “BeTurbo30” While Registering to avail up to 30% discount!
Igo’s Social Media Handles.
https://www.instagram.com/igo_twikes/
https://www.youtube.com/@igo_twikes
________________________________
Electric Vehicles are booming in India
but do you really know how to buy one?
In this video, we expose the financial traps hidden behind EVs that most Indians are blindly ignoring. From battery replacement costs to charging time, resale value, speed, and even hidden dealership tricks,
we break it all down in a simple, transparent way.
—————————————–
Buy our Course: https://biturbomedia.graphy.com/courses/How-To-Write-a-Script-for-Youtube-Documentaries-634d21ebe4b09fc3ab17c3f0
Course Content:
✅HOW TO RESEARCH
✅HOW TO WRITE A HIGH RETENTION SCRIPT STEP-BY-STEP EXPLANATION
✅STUDY MATERIAL
✅SAMPLE SCRIPTS
——————————————
instagram_ https://www.instagram.com/biturbomedia/
——————————————-
Like the background music? I use Epidemic Sound. You can get a 30-day free trial using this referral: https://share.epidemicsound.com/3odh1r.