How Electric Vehicle Battery Is Made? Step-By-Step Process | MG Windsor Factory Exclusive Tour
हेलो एवरीवन, माय नेम इज़ करन। स्वागत करता हूं जागरण हाईटेक के एक लेटेस्ट वीडियो में। आज हम आए हैं एमजी के गुजरात के हलोल में स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में। जहां हम आपको दिखाएंगे बैटरी मैन्युफैक्चरिंग का कंप्लीट प्रोसेस। एक बहुत ही इंटरेस्टिंग बात इस प्लांट की बताऊं। यहां 40% वर्क फोर्स फीमेल्स हैं। जी हां, यूनिटी एंड डायवर्सिटी। [संगीत] बैटरी बनाते समय सबसे पहला स्टेप स्टार्ट्स होता है ऑफकोर्स बैटरी से। यहां पर देखिए इन पैेट्स में यह बैटरीज यहां पर आई हैं और यह इन्हें चेक कर रही है। यानी कि इन पे आरएफ आईडीज लगा रही हैं। इनके वोल्टेज को चेक कर रही हैं। एवरीथिंग इज वर्किंग फाइन और नॉट बिफोर उस बैटरी को यूज़ करने से पहले इसकी थरो टेस्टिंग की जा रही है। यहां पर एक और बहुत ही इंपॉर्टेंट प्रोसीजर हो रहा है। बैटरी मैन्युफैक्चरिंग में इन सेल्स के अराउंड इंसुलेशन लगाई जा रही है ताकि हीट अप होने पर एक दूसरे को ट्रांसफर ना करने लगे या फिर करंट ट्रांसफर ना करने लगे। यू कैन सी बैटरी के दोनों साइड ही इंसुलेशन लगाई जा रही है। सो दिस इज़ आल्सो अ वेरीेंट प्रोसीजर। यह देखिए इन सारी बैटरीज को सीरीज में लगाया गया है और इस टेंसिल के थ्रू दिस इज द स्टेंसिल जो कि इन हाउस डेवलप किया गया है टू पुट दीज़ बैटरीज इन सीरीज। बैटरी टेस्टिंग के बाद दूसरा सबसेेंट पार्ट होगा। इसका जो लोअर केस है इसको देखिए यहां पर उठाया जा रहा है जो कि बाहर से आया होगा मॉड्यूल। एक और चीज यहां पर इस जो बैटरी बॉक्स है या फिर इसको आप लोअर बैटरी बॉक्स कह सकते हैं। इसमें पूरी इसको क्लीनिंग किया जा रहा है वैक्यूम के थ्रू। अब यहां पर लगाई जा रही है एक बहुत इंपॉर्टेंट चीज बैटरीज के अंदर बहुत बड़े केमिकल रिएक्शनंस होते हैं। तो यहां पर कूलिंग कॉइल्स को फिट किया जा रहा है जो आप ये चीज देख रहे हैं। दीज़ आर ऑल कूलिंग कॉइल्स। यहां पर इनलेट है कूलेंट का और वो आउटलेट है। मेटल टू मेटल कांटेक्ट ना हो इसलिए बैटरीज के अलावा इस पूरे बोर्ड पर भी इंसुलेशन लगाई जा रही है। सो मैंने जैसे बताया था कि यहां पर बैटरीज को सीरीज में लगाया जा रहा है। देखिए किसी के पॉजिटिव टर्मिनल्स अलग तरफ है, नेगेटिव टर्मिनल्स अलग तरफ हैं और इस तरीके से एक कंप्लीट बैटरी पैक बनाया जाएगा। मैं आ चुका है इन बैटरीज को आपस में वेल्ड करने का। तो इनके ऊपर ये ब्रैकेट्स लगाए। यहां पर दिखाया था किस तरह सारी बैटरीज के ऊपर ब्रैकेट्स लगाए गए थे। और यहां पर इस लेजर वेल्डिंग मशीन के थ्रू इन सारे ब्रैकेट्स को आपस में वेल्ड किया जाएगा। यहां पर कोई भी ह्यूमन इंटरवेंशन नहीं होगी ताकि यह काम एकदम परफेक्ट हो सके। यहां पर लेजर वेल्डिंग की जा रही है और इन सारी वायरिंग्स को ऊपर फिट किया जा रहा है जो कि सेंसर्स हैं। अगर बैटरी में कुछ ना कुछ खराबी आती है तो ये सारी वायरिंग के सेंसर्स ये आपको एग्जैक्ट बैटरी के एड्रेस तक पहुंचा देंगे कि कौन सी खराब है। और यहां पर सबसे इंपॉर्टेंट चीज यानी कि बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम बीएएमएस इस पूरे बैटरी पैक में लगा दिया गया है। एंड यहां पर है बैटरी मैन्युफैक्चरिंग का सबसे इंपॉर्टेंट पार्ट। यानी अब बनाई गई बैटरी को सबसे पहले चार्ज किया जाएगा और डिस्चार्ज किया जाएगा। यानी इसकी सेल्स की कैपेबिलिटीज को यहां पर चेक किया जाएगा। तो जब बैटरी पहले से बनकर आती है तो उसमें लगभग 40 टू 50% चार्ज रहता है। जहां इसे 100% चार्ज किया जाएगा। उसके बाद इसे वापस 0% तक लाया जाएगा और फिर थोड़ा बहुत चार्ज करके केसिंग के लिए भेज दिया जाएगा। जहां पर इसके ऊपर प्रोटेक्टिव कवरिंग लगाई जाएगी। गैस्केट्स लगाए जाएंगे और एक फाइनल टेस्टिंग की जाएगी। तो आप देख सकते हैं ओवरऑल यहां पर एक जो आप छोटी बैटरी देख रहे हैं यह एमg कॉमट की है और यह एमg विंसर की बैटरी है 52.9 k आर वाली। आप देखिए यहां पर कितने सारे मॉड्यूल्स हैं जो बैटरी को चार्ज और डिस्चार्ज कर रहे हैं। और यहां पर आप टेंपरेचर देखिए। यहां पर ऐसी चीजें हो रही है तो यहां पर टेंपरेचर मेंटेन करना बहुत जरूरी है। 20° सेल्सियस बहुत सारे एयर कंडीशनर लगे हुए हैं यहां पर ताकि हीट को मिनिमाइज कर सके क्योंकि यहां पर बहुत हाई लेवल पे केमिकल रिएक्शनंस हो रहे हैं और आग लगने का काफी खतरा है। इसकी बैटरी केसिंग को ऊपर लगाने से पहले यहां पर एक छोटा सा गैस्केट और लगाया जाएगा टू मेक श्योर इट इज वाटर प्रूफ। अब आप यहां पर देखिए किस तरह बैटरी केसिंग्स को लगाया जा रहा है। पूरे नट्स को टाइट कर रहे हैं ये लोग। कुछ इस तरीके से इन स्टैंड्स पे इन बैटरीज को लगा जाएगा और फिर यह असेंबली फैक्ट्री की तरफ भेजी जाएंगी जहां यह कार्स में अब फिट कर दी जाएंगी। तो यहां पर आपका बैटरी मॉड्यूल इज कंप्लीटली रेडी विद ऑल द सेल्स बीएएमएस। आप मेरे सामने देख रहे हैं 52.9 kw आर का एमg विंटsर का बैटरी पैक जो कि अब कंप्लीटली पैक हो चुका है। इस पे कवरिंग भी लग चुकी है। वाटर प्रूफिंग हो चुकी है। और यह जो सर है फाइनल पैराटर्स को चेक कर रहे हैं इस मशीन के थ्रू इफ द बैटरी इज वर्किंग फाइन द चार्ज, द वोल्टेज, एव्री सेल इज वर्किंग प्रॉपर्ली। दिस इज द फाइनल टेस्टिंग बिफोर योर बैटरी गोज़ इनू द कार। यहां पर होने वाली है सबसे इंपॉर्टेंट चीज एक इलेक्ट्रिक कार की असेंबली में यानी कि इसके बैटरी पैक को अब इसकी बॉडी में फिट किया जाए। यह वीडियो कैसा लगा हमें कमेंट्स में बताएं। इसे लाइक और शेयर करें और ऐसे कंटेंट के लिए जागरण हाईटेक को जरूर सब्सक्राइब करें।
Electric Vehicles are becoming popular in India with every passing year, but some EVs have broken all the records and expectations, like the MG Windsor EV. The electric car is the highest-selling electric car in India, surpassing the likes of the Tata Nexon Electric. But have you ever wondered how electric car batteries are actually made?
In this exclusive video, we take you inside the fascinating world of EV battery manufacturing with MG Windsor. From raw materials to battery cells and finally assembling into powerful packs, discover the step-by-step process that powers the future of mobility. Don’t forget to hit like, share, and subscribe for more insights on EVs, hybrids, and the future of sustainable transport.
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